Forum Posts

Vijay Marko
Dec 11, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
नोनी सुरक्षा योजना उद्देश्य: छत्तीसगढ़ की लड़कियों के सर्वागीण विकास के लिए मदद लाभ: 1 लाख रूपये की आर्थिक मदद श्रेणी: छत्तीसगढ़ सरकारी योजनाएं छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ की लड़कियों के लिए और उनके उज्जवल भविष्य के लिए छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना की शुरुआत की गयी है। छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत 12वीं पास कर चुकी 18 वर्ष से अधिक आयु की लड़कियों को छत्तीसगढ़ राज्य सरकार द्वारा 1 लाख रूपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाएगी। इस छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत छत्तीसगढ़ राज्य की बालिकाओं का शैक्षणिक तथा स्वास्थ्य की स्थिति में सुधार का कार्य भी किया जायेगा। इस छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत छत्तीसगढ़ सरकार की पहल नोनी सुरक्षा योजना 2021 के लांच किये जाने से लड़कियों के उज्जवल भविष्य की राह अब आसान हो जाएगी। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा उनके इस कदम से समाज में लड़कियों के प्रति लोगों की सोच में बदलाव आएगा और इसके द्वारा ही कन्या भूर्ण हत्या की दर को कम किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत पात्रता छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत केवल छत्तीसगढ़ की स्थायी निवासी माता पिता अथवा अभिभावक होने की स्थिति में ही लाभार्थी को इसका लाभ मिल सकेगा। इस छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत 01अप्रैल 2014 के बाद पैदा हुई बेटियों को छत्तीसगढ़ राज्य सरकार के द्वारा आर्थिक मदद दी जाएगी। आपको बता दे कि छत्तीसगढ़ के गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे बीपीएल श्रेणी के आवेदकों को ही इस छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना का लाभ दिया जायेगा। आपको बता दे कि एक परिवार की दो लड़कियों के द्वारा छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना 2021 के तहत लाभ प्राप्त किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के लिए आवश्यक दस्तावेज 1. छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत आवेदन करने वाले आवेदक का आधार कार्ड। 2. छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत आवेदन करने वाले आवेदक का जन्म प्रमाण-पत्र। 3. आवेदन करने वाले आवेदक का मूल निवासी प्रमाण-पत्र। 4. छत्तीसगढ़ नोनी सुरक्षा योजना के तहत आवेदन करने वाले आवेदक का गरीबी रेखा का प्रमाण-पत्र। नाव बिहान योजना : घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम 2005 के क्रियान्वयन के लिए राज्य शासन द्वारा नवाबिहान योजना संचालित है। अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक जिले में महिला संरक्षण अधिकारी की पदस्थापना की गई है। सुविधा व सहायताः-योजना के अंतर्गत पीड़ित महिला को आवश्यकतानुसार विधिक सलाह, परामर्श, चिकित्सा, सुविधा, परिवहन तथा आश्रय सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रावधान रखा गया है। सम्पर्कः-जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/ परियोजना अधिकारी/संरक्षण अधिकारी/सखी के केन्द्र प्रशासक। महिला जागृति शिविर उद्देश्यः-महिलाओं को उनके कानूनी अधिकारों, प्रावधानों के प्रति जागृत करना, विभिन्न सामाजिक कुप्रथाओं के विरूद्ध महिलाओं को जागृत व संगठित करना तथा विभिन्न योजनाओं की जानकारी देकर उन्हें योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना। आयोजन:-विभाग द्वारा इस हेतु प्रदेश के ग्राम पंचायतों, जनपद एवं जिला स्तरों पर समय-समय पर महिला जागृति शिविरों का आयोजन किया जाता है। सम्पर्कः-जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/ परियोजना अधिकारी/पर्यवेक्षक/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। स्वावलंबन योजना पात्रता:- ऐसी महिलाओं जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है अथवा 35 से 45 आयु वर्ग की अविवाहित महिलाओं अथवा कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिलाओं को कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाता है। यौन उत्पीड़न, एचआईवी पाजिटिव एवं तृतीय लिंग (Trans Gender) हितग्राही भी योजना का लाभ लेने की पात्रता रखेगी। प्रशिक्षणः- समस्त प्रशिक्षण मुख्यमंत्री कौशल विकास योजनांतर्गत व्ही.टी.पी. के माध्यम से दिये जाते है। सम्पर्कः-जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/ परियोजना अधिकारी/पर्यवेक्षक/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। सक्षम योजना योजना छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा 2009-10 से आरम्भ की गई है। पात्रताः- प्रदेश में गरीबी रेखा अन्तर्गत जीवन-यापन करने वाली ऐसी महिलाओं जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है अथवा 35 से 45 आयु वर्ग की अविवाहित महिलाएं अथवा कानूनी तौर पर तलाकशुदा महिलायें। यौन उत्पीड़न, एचआईवी पाजिटिव एवं तृतीय लिंग (Trans Gender) हितग्राही भी योजना का लाभ लेने की पात्रता रखेगी। ऋण:- स्वयं का व्यवसाय आरम्भ करने हेतु आसान शर्तो पर 1.00 लाख रूपये तक का ऋण प्रदाय किया जाता है। उक्त ऋण की वापसी 5 वर्षों में केवल 6.5 प्रतिशत साधारण वार्षिक ब्याज दर पर किस्तों में की जाती है। ऋण योजना उद्देश्यः-छत्तीसगढ़ राज्य में महिलाओं को समाजिक एवं आर्थिक रूप से सशक्त किये जाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ महिला कोष द्वारा महिला स्व-सहायता समूहों को आसान शर्तों पर ऋण उपलब्ध कराना। पात्रता एवं ऋण:-योजना अंतर्गत 3 प्रतिवर्ष वार्षिक साधारण ब्याज दर पर प्रथम बार में 50 हजार रूपये तक (वसूली 24 किस्तों में) तथा द्वितीय बार में 2 लाख रूपये तक का ऋण(वसूली 36 किस्तों में ) प्रदाय किया जाता है। यौन उत्पीड़न एवं एच.आई.व्ही. पीड़ित महिलाओं को शासकीय चिकित्सक द्वारा प्रदाय चिकित्सा प्रमाण पत्र के आधार पर आर्थिक गतिविधियों से जोड़े जाने हेतु प्राथमिकता के आधार पर पात्रता की अन्य शर्ते पूर्ण करने पर ऋण प्रदान किया जा सकेगा । इन महिलाओं को जिला प्रबंधक, छत्तीसगढ़ महिला कोष के माध्यम से प्रस्तुत प्रस्तावों पर जिला कलेक्टर स्वीकृति उपरांत 10000/-रूपये (शब्दों में रूपये दस हजार मात्र) का व्यक्तिगत ऋण 3 प्रतिशत साधारण ब्याज की दर पर उपलब्ध कराये जायेंगे। इन महिलाओं द्वारा स्व-सहायता समूह का गठन किये जाने पर समूह को 1.00 लाख (शब्दों में रूपये एक लाख मात्र) की ऋण राशि 3 प्रतिशत साधारण ब्याज की दर पर स्वीकृत की जावेगी। यह ऋण जिला कलेक्टर के अनुमोदन से संबंधित जिला प्रबंधक प्रदान करेंगे। योजना के तहत अन्य शर्ते यथावत रहेंगी। तृतीय लिंग (Trans Gender) हितग्राही भी इन योजना का लाभ लेने की पात्रता रखेगी। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना प्रदेश में गरीब परिवारों को कन्या के विवाह के सम्बन्ध में होने वाली कठिनाई को देखते हुए मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना लागू की गई है। उद्देश्यः-गरीब परिवारों को कन्या के विवाह के संदर्भ में होने वाली आर्थिक कठिनाईयों का निवारण, विवाह के अवसर पर होने वाले फिजूलखर्ची को रोकना एवं सादगीपूर्ण विवाहों को बढ़ावा देने, सामूहिक विवाहों के आयोजन के माध्यम से मनोबल/आत्मसम्मान में वृद्धि एवं उनकी सामाजिक स्थिति में सुधार, सामूहिक विवाहों का प्रोत्साहन तथा विवाहों में दहेज के लेन-देन की रोकथाम करना। योजनान्तर्गत सहायताः-गरीबी रेखा से नीचे जीवन-यापन करने वाले परिवार/मुख्यमंत्री खाद्यान्न योजना अन्तर्गत कार्डधारी परिवार की 18 वर्ष से अधिक आयु की अधिकतम दो कन्याओं को योजना अन्तर्गत लाभ दिलाया जाना है। योजना अन्तर्गत प्रत्येक कन्या के विवाह हेतु अधिकतम 25,000/- रूपये की राशि व्यय किए जाने का प्रावधान है। इसमें से वर-वधु हेतु श्रृंगार सामग्री पर राशि 5,000/- रूपये, अन्य उपहार सामग्री पर राशि 14,000/- रूपये, वधु को बैंक ड्राफ्ट के रूप में राशि 1,000/- रूपये तथा सामूहिक विवाह आयोजन पर प्रति कन्या राशि 5,000/-रूपये तक व्यय की जा सकती है। राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना अन्तर्गत विधवा/अनाथ/निराश्रित कन्याओं को भी शामिल किया गया है। सम्पर्कः-आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवक्षेक, बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। संस्कार अभियान संस्कार अभियान उद्देश्य गर्भ धारण से 06 वर्ष की आयु तक बच्चों के सर्वांगीण विकास हेतु आवश्यक आधार भूत संरचना , वातावरण एवं गुणवत्ता पूर्ण सेवाएं उपलब्ध कराते हुए आंगनबाड़ी केन्द्रों का उन्नयन करना है।संस्कार अभियान के अंतर्गत आंगनवाड़ी केन्द्रों का आकर्षक रंग रोगन , बच्चों के बैठने की जगह , विभिन्न गतिविधियों के लिए स्थान का चिन्हांकन , बच्चों की सुविधा के अनुरूप विभिन्न शैक्षणिक सामग्री का प्रदर्शन , आकर्षक वातावरण का निर्माण , प्रत्येक वस्तु हेतु निर्धारित स्थान एवं सुव्यवस्थित कक्ष जैसी बातों पर ध्यान दिया गया है। संस्कार अभियान के तहत आंगन बाड़ी केन्द्रों को संसाधन सामग्री उपलब्ध कराई गई है , जिसमें प्रारंभिक बाल्या वस्था देख रेख एवं शिक्षापाठ्य चर्या]आंगनबाड़ी केंद्र में शालापूर्व शिक्षा प्रदाय के लिए 52 सप्ताह के समय – सारिणी , लगभग 360 गतिविधि युक्त गतिविधि कोष]थीम पुस्तिका ]3-6 वर्ष के बच्चों के लिए आयु अनुसार पृथक-पृथक गति विधि पुस्तिकाए वं बाल आकलन पत्रक शामिल है। अभियान अंतर्गत गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक बाल्यावस्था देख रेख एवं शिक्षा प्रदाय हेतु विभागीय अमले का क्षमता संवर्धन किया गया है।राज्यस्तर पर 1600 से अधिक प्रतिभागियों तथा जिलास्तर पर लगभग 49]000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को सघन जीवंत प्रशिक्षण दिया गया। संस्कार अभियान के तहत 03 से 06 वर्ष के बच्चों को आंगनबाड़ी केन्द्रों में निर्धारित समय सारिणी अनुसार शालापूर्व शिक्षा प्रदान की जा रही है। इस वर्ष के अंत में द्वितीय चरण का प्रशिक्षण प्रारंभ किया जा रहा है जिसमें विभागीय अमले को विशिष्ट विकास क्षेत्र आधारित चार-चार दिवसीय प्रशिक्षण दिये जाने का प्रस्ताव है। प्रथम चरण में लगभग 49000 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना वर्ष 2009 से प्रारंभ की गई है।गंभीर कुपोषित बच्चों को कुपोषण के चक्र से बाहर लाकर कुपोषण की दर में कमी हेतु योजना का संचालन किया जा रहा है।योजना के तहत गंभीर कुपोषित एवं संकटग्रस्त बच्चों को चिकित्सकीय परीक्षण की सुविधा , चिकित्सक द्वारा लिखी गई दवाएं तथा आवश्यकतानुसार बाल रोग विशेषज्ञों की परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रत्येक विकासखंड में माह में 2 दिवस संदर्भ दिवस के रूप में चिन्हांकित करने का प्रयास। बच्चों के संक्रमण की पहचान। निजी चिकित्सा परीक्षण संस्थान में अधिकतम 300/-रूपये सीमा तक स्वास्थ्य जाWच की व्यवस्था। एक हितग्राही को वर्ष भर में अधिकतम 500/-रूपये तक की दवाएं तथा आवश्यकता होने पर चिकित्सा अधिकारी के परामर्श से इससे अधिक राशि की दवाए भी उपलब्ध कराई जा सकेगी। निजी शिशु रोग विशेषज्ञ की सेवा पर सम्मान स्वरूप 1000/- रूपये का मानदेय एवं 500/-रुपये तक यात्रा व्यय का प्रावधान। इसके अतिरिक्त वर्ष 2016-17 से आवश्यकता पड़ने पर कुपोषित बच्चों के परिवहन के लिए भी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को राशि उपलब्ध कराई गई है। पोषण अभियान: भारत सरकार द्वारा कुपोषण के स्तर में कमी लाने के लिए एक वृहत अभियान के रूप में पोषण अभियान का शुभारंभ किया गया है।यह शुभारंभ 08 मार्च 2018 को माननीय प्रधानमंत्री द्वारा झुंझूनू , राजस्थान में किया गया है।पोषण अभियान देश के सभी राज्यों में वित्तीय वर्ष 2017-18 से आगामी तीन वर्षों में चरण बद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।प्रथम चरण में राज्य के 12 जिलों को लिया गया था तथा द्वितीय चरण वर्ष 2018-19 से शेष 15 जिलों को लिया गया है।इस प्रकार राज्य के सभी 27 जिलों में पोषण अभियान क्रियान्वित है।पोषण अभियान के लक्ष्य एवं घटकों का विवरण निम्नानुसार है:- अभियान के लक्ष्य:- पोषण अभियान का लक्ष्य राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित किया गया है , जिसके अनुसार 0 से 6 वर्ष आयु समूह के बच्चों , गर्भवती महिलाओं एवं धात्री माताओं में विद्यमान कुपोषण स्तर को चरण बद्ध तरीके से प्रति वर्ष 02 प्रतिशत की कमी लाते हुए 03 वर्षों में 06 प्रतिशत की कमी लाना लक्षित किया गया है। मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान: छत्तीसगढ़ राज्य में 06 वर्ष से कम आयु के बच्चों में व्याप्त कुपोषण एवं एनीमिया तथा 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में व्याप्त एनीमिया एक चुनौती है जिसे जड़ से समाप्त करने का निर्णय लिया गया।छत्तीसगढ़ राज्य में NFHS-4 के सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 05 वर्ष से कम आयु वर्ग के लगभग 37 प्रतिशत बच्चे कुपोषण एवं 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की 47 प्रतिशत महिलायें एनीमिया से पीड़ित है। बच्चों एवं महिलाओं के पोषण स्तर में सकारात्मक सुधार हेतु आदिवासी बाहुल्य दंतेवाड़ा जिले में माननीय मुख्यमंत्रीजी की मंशानुसार ‘‘सुपोषित दंतेवाड़ा अभियान‘‘ दिनांक 24 जून 2019 में प्रारंभ किया गया।अभियान की सफलता को देखते हुये प्रदेश के अन्य जिलों में भी गांधीजी के 150 वीं जयंती के अवसर पर 02 अक्टूबर 2019 से मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान प्रारंभ किया गया है। अभियान का प्रमुख उद्देश्य 06 वर्ष आयु तक के बच्चे में कुपोषण एवं एनीमिया तथा 15 से 49 आयु वर्ग की महिलाओं को एनीमिया से मुक्त करना है। अभियान अंतर्गत प्रदेश के लगभग 1-85 लाख हितग्राहियों को गर्म भोजन एवं 3-53 लाख हितग्राहियों को अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में अण्डा, चिकी, लड्डू, मूंगफली, दलिया आदि प्रदान किया जा रहा है।इसके अतिरिक्त एनीमिक बच्चे एवं महिलाओं के आई.एफ.ए. अथवा सिरप कृमि नाशक दवा एवं व्यवहार तथा खान पान में सकारात्मक परिवर्तन के लिए परामर्श सेवाएँ दी जा रही है। इस अभियान की मुख्य बात यह है कि अभियान का क्रियान्वयन जन सहयोग एवं सहभागिता से किया जा रहा है।इस अभियान के क्रियान्वयन में होने वाले व्यय की प्रति पूर्ति जिला स्तर पर उपलब्ध खनिज न्यास निधि एवं सी.एस.आर. मद तथा जन सहयोग से प्राप्त धनराशि से किया जा रहा है ।इसके लिए मुख्यमंत्री सुपोषण निधि का गठन किया गया है। जिले की परिस्थिति एवं आवश्यकता अनुरूप अभियान का संचालन के लिए जिला स्तर पर कार्य योजना एवं रणनीति तैयार कर क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस अभियान को 03 वर्ष के लिए चलाये जाने का निर्णय लिया गया है।अभियान को योजना बद्ध तथा सतत्जारी रखने के लिए अभियान को योजना का रूप देने पर विचार किया जा रहा है। महतारीजतन योजना: योजना के तहत आंगनवाड़ी केन्द्र के माध्यम से आकर्षक थाली गर्भवती महिलाओं को पृथक-पृथक मेन्यू अनुसार प्रदाय की जा रही है]जिसमें चांवल, दाल, रोटी, रसेदार व सूखी सब्जी, अचार, पापड़ सलाद आदि दिया जा रहा है।इसके अतिरिक्त महिलाओं को घर ले जाने हेतु प्रतिदिन 75 ग्राम के मान से (सप्ताह में 06 दिवस हेतु) 450 ग्राम का साप्ताहिक पैकेट रेडी टू ईट दिया जाने का प्रावधान है।प्रदेश में लगभग 1-61 लाख महिलाओं को इस योजना से लाभांवित किया जा रहा है।वर्ष 2019&20 में इस हेतु 23-50 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है। पूरक पोषण आहार कार्यक्रम समेकित बाल विकास परियोजनाओं में पूरक पोषण आहार की व्यवस्थाः- प्रदेश में एकीकृत बाल विकास सेवाएँ (आई.सी.डी.एस) अंतर्गत आँगनवाडी केन्द्रों द्वारा दी जाने वाली छः सेवाओं में से पूरक पोषण आहार एक महत्वपूर्ण सेवा हैं । आँगनवाडी केन्द्रों के माध्यम से 6 माह से 3 वर्ष आयु के बच्चों, 3 वर्ष से 6 वर्ष आयु के बच्चों तथा गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को पूरक पोषण आहार का प्रदाय किया जाता हैं । हितग्राहियों को वर्तमान में प्रदाय किये जा रहे पूरक पोषण आहार का विवरण निम्नानुसार हैं - नाश्ता एवं गर्म पका हुआ भोजन:- आँगनवाडी केन्द्रों में आने वाले 3 से 6 वर्ष के आयु के सामान्य एवं गंभीर कुपोषित बच्चों को गर्म पके हुए भोजन (105 ग्राम) के साथ-साथ नाश्ता भी दिया जाता हैं । नाश्ते में रेडी टू ईट फूड (75 ग्राम), उबला भीगा चना, देशीगुड़ (50 ग्राम), भुना मुंगफली दाना, गुड़ (38 ग्राम) प्रतिदिन अलग-अलग नाश्ता चक्रानुक्रम में प्रदाय किया जाता हैं । 3 से 6 वर्ष आयु के गंभीर कुपोषित बच्चों को उपरोक्तानुसार नाश्ता एवं गर्म पके हुए भोजन के साथ अतिरिक्त रूप से रेडी-टू-ईट फूड (85 ग्राम) का प्रदाय किया जाता हैं । नाश्ता एवं चावल आधारित गर्म पके हुए भोजन का प्रदाय महिला स्व सहायता समूहों, ग्राम पंचायतो, नगरीय निकायों के माध्यम से किया जा रहा हैं । रेडी-टू-ईट फूड :- 6 माह से 3 वर्ष के आयु के सामान्य बच्चों को 135 ग्राम, 6 माह से 3 वर्ष आयु के गंभीर कुपोषित बच्चों को 211 ग्राम तथा गर्भवती व शिशुवती महिलाओं को 165 ग्राम रेडी-टू-ईट फूड का प्रदाय प्रतिदिन के मान से टेक होम राशन के अंतर्गत साप्ताहिक रूप से किया जाता हैं । गेहूँ आधारित रेडी-टू-ईट फूड का निर्माण एवं प्रदाय का कार्य महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया जा रहा हैं । पूरक पोषण आहार कार्यक्रम के अंतर्गत 6 माह से 6 वर्ष के 20.84 लाख बच्चों तथा 4.69 लाख गर्भवती व शिशुवती महिलाओं, इस प्रकार कुल 25.53 लाख हितग्राहियों को लाभांवित किया जा रहा हैं । वित्तीय वर्ष 2013-14 में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम हेतु 460 करोड़ रू. का बजट प्रावधान किया गया हैं । किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण से संबंधित सबला योजना अंतर्गत पूरक पोषण आहार कार्यक्रमः- किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण से संबंधित सबला योजना के अंतर्गत किशोरी बालिकाओं को भी पूरक पोषण आहार का प्रदाय किया जा रहा है । योजना के अंतर्गत 11 से 14 वर्ष आयु की शाला त्यागी किशोरी बालिकाओ तथा 14 से 18 आयु वर्ग की सभी किशोरी बालिकाओं को प्रतिदिन 5/- रू. के मान से पूरक पोषण आहार का प्रदाय किया जा रहा हैं । इस योजना में पूरक पोषण आहार कार्यक्रम, केन्द्र प्रवर्तित योजना के रूप में लागू किया गया हैं, अर्थात् पूरक पोषण आहार कार्यक्रम पर होने वाले वास्तविक व्यय का 50 प्रतिशत केन्द्र शासन द्वारा तथा 50 प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन किया जा रहा है । सबला योजना राज्य के रायपुर, बस्तर, रायगढ़, राजनांदगांव गरियाबंद, बलौदाबाजार, कोण्डागांव सूरजपूर बलरामपुर एवं सरगुजा जिलों में लागू है। महिला स्व-सहायता समूह गठन एवं सशक्तिकरण: असंगठित ग्रामीण महिलाओं को संगठित करना। महिलाओं को समूह में छोटी-छोटी बचत करने तथा अपनी छोटी-मोटी जरूरतों की पूर्ति हेतु समूह में ही न्यूनतम दर पर लेन-देन हेतु सक्षम बनाने में सहयोग प्रदान करना। महिलाओं का सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण। संपर्क:- आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पर्यवेक्षक, बाल विकास परियोजना अधिकारी, जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी, संबंधित जिला कलेक्टर। किशोरी बालिकाओं के लिए योजना: भारत शासन द्वारा किशोरी बालिकाओं के सशक्तिकरण के लिए नवीन सबला योजना 19 नवंबर 2010 से प्रारंभ की गई है । योजना देश के 200 जिलों में पायलेट रूप में प्रारंभ की गई है जिसमें छत्तीसगढ़ के 10 जिले - रायपुर, राजनांदगांव, रायगढ़, बस्तर, बलौदाबाजार, गरियाबंद, कोण्डागांव, बलरामपुर, सूरजपूर एवं सरगुजा शामिल हैं । योजनांतर्गत 11-18 वर्ष की किशोरी बालिकाओं के लिए निम्नानुसार गतिविधियां आयोजित की जाती है - पोषण आहार प्रदाय आईएफए टेबलेट वितरण स्वास्थ्य जांच एवं संदर्भ सेवा स्वास्थ्य एवं पोषण शिक्षा परिवार कल्याण, ARSH (Adolescents Reproduction and Sexual Health) बच्चों की देखभाल एवं गृह प्रबंधन पर मार्गदर्शन लाईफ स्किल एजुकेशन एवं लोक सेवाओं तक पहुंच व्यवसायिक प्रशिक्षण उज्जवला गृह योजना उद्देश्यः-बच्चों तथा महिलाओं की टैफिकिंग के निवारण तथा टैफिकिंग और व्यावसायिक यौन शोषण की पीड़ितों के बचाव, पुनर्वास और उन्हें समाज में पुनः जोड़ना। भारत शासन द्वारा राज्य में बिलासपुर, कोरबा तथा कोरिया में स्वैच्छिक संगठनों को संरक्षण एवं पुनर्वास गृह (पी एण्ड आर होम) संचालन की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसके अलावा रायपुर में स्वैच्छिक संगठन को रोकथाम एवं बचाव के लिए परियोजना स्वीकृत किया गया है। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। स्वाधार गृह योजना संकटग्रस्त महिलाओं विधवा, निराश्रित, तिरस्कृत, परित्यक्ता को आश्रय व सहारा प्रदान करने तथा निःशुल्क परिपालन व पुर्नवास के लिए प्रदेश में 03 स्वाधार गृह का संचालन बिलासपुर, सरगुजा एवं कांकेर में किया जा रहा है। इस योजना में केन्द्र एवं राज्य का अंशदान 60:40 का है। संस्था में इन महिलाओं के निःशुल्क आवास, भरण-पोषण, शिक्षण, प्रशिक्षण, विविध सहायता और पुर्नवास व्यवस्था की जाती है। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। सखी (वन स्टाप सेन्टर) उद्देश्यः-पीड़ित व संकटग्रस्त, जरूरतमंद महिला को एक ही छत के नीचे उनकी आवश्यकतानुसार चिकित्सा, विधिक सहायता, मनोवैज्ञानिक सलाह, पुलिस सहायता, अस्थायी आश्रय, मानसिक चिकित्सा, परामर्श सुविधा/सहायता तत्काल उपलब्ध कराना । वन स्टाप सेन्टर किनके लिये:- संकटग्रस्त/पीड़ि़त में वे सभी महिलाएं (18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाएं भी सम्मिलित है) जिन्हे सहायता की आवश्यकता है। प्रदेश के प्रत्येक जिले में ‘‘सखी’’ वन स्टाप सेंटर संचालित है। सुविधा व सहायता:- आपातकालीन सहायता एवं बचाव। चिकित्सकीय सहायता। महिला को एफआईआर/डीआईआर/एनसीआर दर्ज करने में सहायता उपलब्ध कराना। मनोवैज्ञानिक/सामाजिक/परामर्श/सलाह व सहायता। विधिक सलाह/सहायता/विधिक परामर्श। आपातकालीन आश्रय सुविधा सम्पर्कः-जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/ परियोजना अधिकारी/पर्यवेक्षक/केन्द्र प्रशासन/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता। महिला पुलिस स्वयं सेविका योजना महिलाओं के साथ लिंग विभेद/असमानता के फलस्वरूप महिलाओं के विरूद्ध हिंसा अनेक रूपों में समाज में विद्यमान है। महिलाओं के साथ होने वाली हिंसा की विभिन्न घटनाओं यथा घरेलू हिंसा, लैंगिक हिंसा, दहेज उत्पीड़न, अवैध मानव व्यापार, बाल विवाह, लिंग चयन व भू्रण हत्या आदि की त्वरित सूचना प्राप्ति एवं उस पर शीघ्र कार्यवाही होने पर ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने में सहायता मिल सकती है। इसी परिपेक्ष्य में योजना पायलेट रूप में भारत शासन द्वारा प्रदेश के दुर्ग एवं कोरिया जिले में विगत वर्ष 2017-18 से लागू की गई है। महिला पुलिस स्वयं सेवक समाज और पुलिस के बीच जेण्डर आधारित मुद्दों पर एक सेतु के रूप में कार्यरत है और नागरिक एवं पुलिस के बीच सुविधा लिंक की तरह कार्य कर रही है। महिला पुलिस स्वयं सेविका पुलिस स्टेशन में पदस्थ पुलिस निरीक्षक को सीधे रिपोर्ट कर रही है। स्थानीय प्रशासन एवं पुलिस को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु आवश्यक सुझाव एवं फीडबैंक प्रदान करना। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/परियोजना अधिकारी/एस.डी.पी.ओ./पर्यवेक्षक/आंगनबाड़ी कार्यकर्ता/ महिला पुलिस स्वयं सेविका। 181 महिला हेल्पलाईन उद्देश्यः-महिलाओं के विरूद्ध होने वाली हिंसा/घटना के मामलों में त्वरित सहायता उपलब्ध कराने के उददेश्य से छत्तीसगढ़ राज्य मुख्यालय रायपुर में महिला हेल्पलाईन 181 का राज्य के समस्त जिलों में 27 संचालित सखी वन स्टाप सेंटर के साथ समन्वय किया गया है। महिला हेल्पलाईन टाल फ्री नं. 181 का संचालन वर्ष 2016 से प्रारंभ किया गया है। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिला रायगढ़ एवं बीजापुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। सीधे 181 में काल किया जा सकता है। वेबसाईट www.181chhattiagarh.in के माध्यम से आनलाईन आवेदन किया जा सकता है। ई-मेल help@181chhattisgarh.in फेसबुक अकाउंट www.facebook.com/181WHLChhattisgarh मोबाईल नं. 9406005181 पर वाट्सएप। बेटी-बचाओ, बेटी-पढ़ाओ भारत शासन द्वारा पूरे देश के 100 चयनित जिलों में बेटी बचाओं बेटी पढ़ाओ योजना दिनांक 22 जनवरी 2015 से लागू की गई। बाल लिंगानुपात में गिरावट दर्ज की गई है जो कि संवेदनशील मुद्दा होने के साथ-साथ अत्यधिक चिंता का विषय है। बाल लिंगानुपात (सीएसआर) को 0 से 6 वर्ष में प्रति 1000 बालकों में बालिकाओं की संख्या के रूप में परिभाषित किया गया है। छत्तीसगढ़ में बाल लिंगानुपात वर्ष 2001 में 975 था जो वर्ष 2011 की स्थिति में 964 हो गया। ‘‘बेटी-बचाओं, बेटी-पढ़ाओ’’ योजना अंतर्गत छत्तीसगढ़ राज्य के जिला-रायगढ़ के बाद वर्तमान में जिला-बीजापुर को मल्टीसेक्ट्राल हस्तक्षेप (Multi-sectoral Intervention) जिले के रूप में चयनित किया गया है। उद्देश्यः- बच्चों के जन्म के समय लिंग चयन तथा विभेद को समाप्त करना। बालिकाओं की उत्तरजीविका व उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना। बालिकाओं की शिक्षा को सुनिश्चित करना। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिला रायगढ़ एवं बीजापुर के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। प्रधानमंत्री मातृ वन्दना योजना उद्देश्यः- गर्भवती एवं धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार एवं उनकी मजदूरी की पूरक प्रतिपूर्ति, हेतु योजना संचालित। पात्रता:- योजनांतर्गत ऐसी गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं को छोड़कर जो केन्द्र सरकार या राज्य सरकारों या सार्वजानिक उपक्रमों के साथ नियमित रोजगार में है या जो वर्तमान में लागू किसी कानून के अन्तर्गत समान लाभ प्राप्त कर रही है, सभी गर्भवती महिलाएं एवं स्तनपान कराने वाली माताएं पात्र होगीं। योजना 01.01.2017 से लागू की गई है, तथा प्रथम जीवित संतान हेतु ही योजना का लाभ देय है। योजना अंतर्गत गर्भवती धात्री महिलाओं को प्रथम जीवित संतान के लिये तीन किस्तो में 5000/- रूपये राशि का भुगतान किये जाने का प्रावधान है। सम्पर्कः-जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी/ परियोजना अधिकारी/पर्यवेक्षक/नजदीक के आंगनबाड़ी। कामकाजी महिलाओ के लिए हास्टल योजना भारत सरकार द्वारा 1972-1973 से शहरों, कस्बो एवं ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं को हास्टल सुविधा उपलब्ध कराने बाबत् भवन निर्माण हेतु अनुदान सहायता योजना का क्रियान्वयन किया गया है। प्रदेश में वर्तमान में 04 जिलों में कामकाजी महिला हास्टल का संचालन हो रहा है। उद्देश्यः- व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं के कारण अपने परिवार से दूर रहने वाले कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और किफायती आवास की उपलब्धता को बढ़ावा देना है। सम्पर्कः-सम्बन्धित जिले के जिला कार्यक्रम अधिकारी/जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी। राष्ट्रीय शिशुगृह योजना योजनांतर्गत 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चो को दिवस देखभाल सुविधायें उपलब्ध कराई जाती है। यह योजना पंजीकृत स्वैच्छिक संगठनो, महिला मंडलो तथा राज्य / संघ राज्य क्षेत्र प्रशासन के माध्यम से संचालित की जाती है ।योजना के तहत ऐसे बच्चे जिनके माता-पिता की मासिक आय 1800/-रूपये से कम है, कृषि श्रमिको के बच्चे, अजा / अजजा जनजाति वर्ग के बच्चे, रोजगारोन्मुखी योजनाओ जैसे स्टेप / नोराड में कार्यरत महिलाओ के बच्चे तथा साम्प्रदायिक दंगो के शिकार परिवारो के बच्चे सहायता / लाभ प्राप्त करने के पात्र है। योजना अंतगर्त सामान्य शिशुगृह केन्द्रों तथा आंगनबाड़ी-सह-शिशुगृह केन्द्रो के लिये सहायता प्रदान की जाती है। STEP योजना: Support to Training and Employment Program for Women उद्देश्य : व्यवहार्य समूहों में महिलाओं को संगठित करना और सुविधाएं उपलब्ध कराना और ऋण उपलब्ध कराना • कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण प्रदान करना • महिलाओं के समूहों को रोजगार लेने में सक्षम बनाना बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज प्रदान करके कार्यक्रम • प्रशिक्षण और रोजगार में और सुधार के लिए सहायता सेवाएं प्रदान करना निम्न क्षेत्रों को इस योजना में शामिल किया जा रहा है। कृषि, 2. पशुपालन, 3. डेयरी, 4. मत्स्य पालन, एस हथकरघा। 6. हस्तशिल्प 7. खादी और ग्रामोद्योग और 8. शास्त्र। 9. सामाजिक वानिकी और 10. बंजर भूमि विकास krshi, STEP कार्यक्रम के तहत कवर किए जाने वाले लक्ष्य समूह में शामिल हैं: दिहाड़ी मजदूर, अवैतनिक दैनिक कामगार, महिला मुखिया वाले परिवार, प्रवासी मजदूर। आदिवासी और अन्य वंचित समूह। लाभार्थी उर, डिटेक्‍ट प्रोजेक्‍ट्स होंगे अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के परिवारों पर विशेष ध्यान देने वाली गरीब या पिछड़ा वर्ग हाशिए पर रहने वाली महिलाएं, महिलाएं गरीबी रेखा से नीचे के घरों और परिवारों का नेतृत्व करती हैं। .
0
0
396
Vijay Marko
Dec 10, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
हसदो बाँगों बांध मिनीमाता परियोजना: 1961-62 में बना हसदेव बाँगों बांध छत्तीसगढ़ का सबसे ऊंचा बांध है। 80.5 मीटर ऊंचा और 2509 मीटर लंबा छत्तीसगढ़ का पहला बहूद्देशीय परियोजना है। बांध का पानी कोरबा, रायगढ़, जशपुर-चांपा जिलों को लाभ पहुँचाता है।इस पर 120 MW की बिजली परियोजना भी है। कोरबा, रायगढ़, जांजगीर चांपा जिलों को इसका लाभ मिलता है। SECL, NTPC, BALCO, CSEB को इसके पानी की आपूर्ति की जाती है। गंगरेल बांध: रविशंकर सागर के नाम से भी जाना जाता है। महानदी नदी पर बना हुआ यह बांध छत्तीसगढ़ के बड़े परियोजनाओं में से एक है। 30.5 मीटर ऊंचा और 1830 मीटर लंबा है। 10 MW का जल विद्युत परियोजना भी इसमे लगा है। मुरुमसिल्ली बांध : धमतरी जिले में स्थित ये बांध, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव बांध के नाम पर रखा गया है । ब्रिटिश काल में बना ये बांध 1914 से 1923 के बीच बन कर तैयार हुआ। इसे सिलियारी नदी पर बनाया गया है । इसकी ऊंचाई 34.15 मीटर और लंबाई 2591 मीटर है। दुधवा बांध:24.53 मीटर ऊंचा 2906 मीटर लंबा ये बांध कांकेर जिले में स्थित है ये बांध भी महानदी पर बना है। 1953 से 1964 के बीच बना ये बांध दुधवा नाम के गाँव के पास बना है इसीलिए इसका नाम दुधवा बांध पड़ा। तांदुला परियोजना (बालोद): तांदुला जलाशय तांदुला नदी और सूखा नाला के संगम पर स्थित प्रदेश का प्रथम नदी परियोजना तांदुला परियोजना का निर्माण ब्रिटिश अभियंता एडम स्मिथ के मार्गदर्शन में वर्ष 1910 से 1920 के बीच पूरा हुआ। यह छत्तीसगढ़ का तीसरा साबसे बड़ा जलाशय है। खेरकट्टा बांध: 20 मीटर ऊंचा और 610 मीटर लंबा बांध पखांजुर में स्थित है। ये बांध मठोली नदी पर स्थित है। रुद्री बैराज जल विद्युत :-इसकी स्थापना 1915 में हुई थी। ये महानदी पर धमतरी जिले में स्थित है। ये विद्युत 0.2 MW बिजली उत्पादन भी करता है। सिकासार जल विद्युत:-गरियाबंद जिले में स्थित यह परियोजना 1977 में बन कर तैयार हुआ। पैरी नदी को बांधने वाला ये बांध 7 MW बिजली का उत्पादन करता है। प्रस्तावित जल विद्युत केंद्र 1. बोधघाट पतियोजना क्षमता 4 *125 = 500 MW जल विद्युत उत्पादन प्रस्तावित है। ये दंतेवाड़ा जिला के भोपालपटनम में इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित है। 2. कोरबा पश्चिम लघु जल विद्युत उत्पादन क्षमता 0. 85 *2 = 1. 7 MW प्रस्तावित है। 3. मटनार जलविद्युत परियोजना उत्पादन क्षमता - 3 *20 = 60 MW विद्युत उत्पादन प्रस्तावित है। जो की 11 पंचवर्षीय योजना में प्रस्तावित हुआ। ये बस्तर जिले में प्रस्तावित है। 4. कन्हार जल विद्युत गृह - बलरामपुर में प्रस्तावित है। छत्तीसगढ़ की अन्य जल परियोजनाएँ मांड परियोजना – रायगढ़ कोडार / वीर नारायण सिंह परियोजना – महासमुंद खुड़िया / राजीवगांधी परियोजना – मुंगेली घुनघुट्टा परियोजना – सरगुजा महान परियोजना – सरगुजा भैंसाझार परियोजना – बिलासपुर बोधघाट परियोजना – बस्तर कुम्हारी बांध : रायपुर बंजारी नाला खरखरा बलोद जिला खरखरा नदी गोंदली जलाशय: जहर नदी बालोद जिला किंकरी बांध: सारंगढ़, किंकरी नाला 1982 कोसारटेडा परियोजना –कोसारटेड़ा नाला बस्तर घोंघा बैराज: घोंघा नाला, बिलासपुर साराडीह बैराज: महानदी, जांजगीर चांपा बसंतपुर बैराज, महानदी, जांजगीर चांपा मिरोनी बैराज महानदी, जांजगीर चांपा कलाम बैराज महानदी, जांजगीर चांपा सूतियापाट, शिवनाथ, कवर्धा सरोदा, सकरी नदी कवर्धा कर्रा नाला बैराज , कर्रा नाला, कवर्धा छीरपानी, फोका नाला, कवर्धा मायना, नैनी, कांकेर परलकोट, देवधा, कांकेर बल्लार, बल्लार, बलौदा बाजार कुंवरपुर, चुलहट नाला, सरगुजा
0
0
10
Vijay Marko
Dec 06, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
उत्तर है 2 । सम संख्या हम उन संख्याओं को कह सकते हैं जिन्हें 2 से पूरी तरह से विभाजित किया जा सकता है। अंग्रेजी में हम इन्हें even number कहते हैं। 2, 4, 6,8, 10.. आदि अभाज्य, यहीं जिसे भाग न किए जा सके। अंग्रेजी में Prime Number. अगर कोई संख्या को किसी भी दूसरी संख्या से भाग न दिया जा सकें वह अभाज्य संख्या या prime number कहलाता है। इसे और अच्छे से समझें तो अभाज्य संख्या के दो गुणनखंड हो सकते हैं । एक वह स्वयं और दूसरा 1। जैसे 2=2 x 1 5=5 x 1 7=7 x 1 11=11 x 1 13=13 x 1 . . . . आदि। संख्या 1 का गुणनखंडन करने पर हमें मिलता है 1 x 1. दोनों एक ही संख्या है इसीलिए संख्या 1, अभाज्य संख्या में नहीं गिन जाता
0
0
16
Vijay Marko
Nov 29, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
1 नवंबर 2000 को 26 वें राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ राज्य कि स्थापना हुई। मध्यप्रदेश के पूर्वी भाग में से 10 छत्तीसगढ़ी और 6 गोंडी भाषी जिलों को अलग करके इसका गठन हुआ। 1920 के दशक में पहली बार छत्तीसगढ़ नाम से अलग राज्य बनाने की मांग उठी थी। 1924 रायपुर काँग्रेस ने पहली बार इसकी मांग रखी। 1938 में काँग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन में भी इसका मुद्दा उठाया गया। मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए पहली संस्थागत और विधायी पहल की। 18 मार्च, 1994 को,एक अलग छत्तीसगढ़ की मांग का एक प्रस्ताव पेश किया गया और मध्य प्रदेश विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से पारित किया गया। 1998 में, भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के सोलह जिलों से अलग छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण के लिए एक विधेयक का मसौदा तैयार किया। अलग छत्तीसगढ़ के लिए यह बिल लोकसभा और राज्यसभा में पारित हो गया, जिससे अलग छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ। भारत के राष्ट्रपति ने 25 अगस्त 2000 को मध्य प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2000 को अपनी सहमति दी।इस पूरे घटना क्रम में यूं तो कई नेता सामने आए पर, चंदूलाल चंद्राकर के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण मंच इस मुहिम का ध्वज वहाक बना। छत्तीसगढ़ी संस्कृति, भाषा, भूखंड आदि सारी योग्यताओं को सिद्ध करते हुए छत्तीसगढ़ ने अपना अधिकार हासिल किया
छत्तीसगढ़ की स्थापना content media
0
0
19
Vijay Marko
Nov 29, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
बस्तर की शार्क नाम से प्रसिद्ध यह मछली 150 किग्रा तक हो सकती है। इसके आकार के कारण ही इसे बस्तर के शार्क की उपमा डी गई है। विशेष रूप से इंद्रावती नदी में पाई जाने वाली बोध अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। इंद्रावती नदी पर हो रहे जल परियोजनाओं ने इसके आवास पर प्रतिकूल असर डाला है जिससे इसकी संख्या कम हो गई है। बोध गाँव, बोध घाट परियोजना, बोध मंदिर आदि इस बात का द्योतक है कि बोध अपने क्षेत्र की कितनी महत्वपूर्ण निवासी है। कैट्फिश परिवार से संबंधित ये मछली आक्रामक होती है और अपने इन्ही गुणों के कारण आदिवासियों,विशेष रूप से कुड़ुक लोगों में पूज्य है। इसके सम्मान में जात्रा का आयोजन भी होता है। बढ़ती आबादी और विकास की होड़ में इसका शिकार भी बढ़ा है और आवास भी काम हुआ है।इनका संरक्षण आती आवश्यक हो गया है। photo credit: Dainik Jagran
बस्तर की शार्क : बोध मछली  content media
0
0
8
Vijay Marko
Nov 27, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
छत्तीसगढ़ के लिए स्वच्छता सर्वेक्षण 2021 फिर से विशेष रहा। लगातार तीसरे वर्ष छत्तीसगढ़ ने सबसे स्वच्छ राज्य होने का गौरव प्राप्त किया। राज्य के 67 नगरीय निकायों ने इस सर्वेक्षण में हिस्सा लिया, जो किसी भी राज्य से अधिक है। नगरीय श्रेणी में प्रथम स्थान प्राप्त किया साथ ही देश का पहला ODF++ राज्य बना। छत्तीसगढ़ के अधिकारी इसे 6-R की रणनीति बताते हैं। 6R का मतलब है, Rethink, Reuse, Recycle, Repair, Reduce, Refuge. राज्यों में दूसरा स्थान महाराष्ट्र और तीसरा स्थान मध्यप्रदेश को मिला इस सर्वेक्षण में इंदौर को लगातार 5 वे वर्ष भी सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला। दूसरे स्थान पर सूरत जबकि तीसरा स्थान विजयवाड़ा को प्राप्त हुआ।
0
0
10
Vijay Marko
Nov 27, 2021
In CGPSC, VYAPAM, SSC Railway
भाग करने का अर्थ है टुकड़े करना, जैसे 4/2 का अर्थ हुआ 4 को 2 बराबर भागों में बांटना या विभाजित करना। अब आप सोचिए किसी भी अंक को 0 भाग में कैसे बाँटा जाए। इसीलिए ये प्रश्न महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसे लेकर बहुत छात्र असमंजस में पड़ जाते हैं। उत्तर है अनंत या infinity. ∞
0
0
12

Vijay Marko

Admin
More actions